हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हमदान प्रांत के इमाम ए जुमआ हुज्जतुल इस्लाम मोहम्मदी ने जुमआ के ख़ुत्बे में कहा कि अरबईन-ए-हुसैनी के निकट आने के मद्देनज़र लोग इमाम हुसैन (अ.स.) के ज़ायरीन की सेवा के लिए अरबईन के मोकिबों की सहायता करें। उन्होंने बताया कि जुमआ की नमाज़ के दौरान एकत्रित होने वाली सहायता राशि आगामी सप्ताहों में मोकिबों और ज़ायरीन की मेहमाननवाज़ी पर खर्च की जाएगी।
उन्होंने शहीद नेता की याद में आयोजित कार्यक्रमों और अज़ादारी में जनता की बड़ी भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि लोगों ने कठिनाइयों और लंबी दूरियों के बावजूद अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने अधिकारियों से भी जनता के बीच अधिक सक्रिय रूप से उपस्थित रहने का आग्रह किया।
उन्होंने संविधान संरक्षक परिषद की स्थापना दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्था इस्लामी गणराज्य की इस्लामी और जनतांत्रिक पहचान की रक्षा करती है तथा क़ानूनों की समीक्षा और चुनावों की निगरानी के माध्यम से क्रांति और जनता के मत की सुरक्षा करती है।
इमाम हसन मुज्तबा (अ.स.) की शहादत की वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इमाम हसन (अ.स.) अहले बैत (अ.) के सबसे मज़लूम इमामों में से हैं, लेकिन साथ ही सबसे साहसी भी हैं, क्योंकि उन्होंने इस्लाम की रक्षा और दीन के विनाश को रोकने के लिए अपनी प्रतिष्ठा तक को इस्लाम के हित में कुर्बान कर दिया।
उन्होंने देश की प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जनता की मांगों को राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र आगे बढ़ाया जाना चाहिए। सशस्त्र बलों का समर्थन और देश की रक्षा में उनके प्रयासों का सम्मान करना अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है।
उन्होंने दोहराया कि जनता की सबसे महत्वपूर्ण मांग आर्थिक समस्याओं का समाधान और जीवन-यापन की स्थिति में सुधार है। साथ ही, "शहीद नेता" के खून का बदला लेने और अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग भी व्यापक जनभावना का हिस्सा है।
उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे ऐसे बयान देने से बचें जिनसे दुश्मनों को प्रोत्साहन मिले। उनके अनुसार, अधिकारियों की नीतियां और बयान प्रतिरोध के मोर्चे की तरह दृढ़ता और एकता से परिपूर्ण होने चाहिए।
अंत में उन्होंने समर्पित और सेवाभावी चिकित्सकों की सराहना की तथा चिकित्सा क्षेत्र में होने वाली कुछ अनियमितताओं, जैसे अवैध रूप से अतिरिक्त धन (अंडर-द-टेबल फीस) लेने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की, ताकि जनता का चिकित्सा व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
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